बाल कविता
पढ़े लिखे बर मोला आही, तब मँय नाम कमाहूँ।
ये बाबू गो नाम लिखा दे, मँय हर इसकुल जाहूँ।
कबतक छेरी के पाछू मा, जिनगी अपन गँवाहूँ।
नाम लिखा दे इसकुल जा के, महूँ पढ़े बर जाहूँ।
मोर उमर के संगी साथी, जम्मो इसकुल जाथे।
आनी बानी गीत कहानी, मोला बहुत सुनाथे।
छेरी चरवाहा मँय बनके, कब तक उमर पहाहूँ।
ये बाबू गो नाम लिखा दे, मँय हर इसकुल जाहूँ।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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