बाल कविता
आम पके कइसे मँय खावँव। कइसे करके भला गिरावँव।
का ऊपर मा चढ़े ल परही। गिर जाहूँ ता कोन पकड़ही।
आम देख मन ललचावत हे। सिरतो मुँह पानी आवत हे।
पत्थर मार गिराना परही। तब्भे आम एकाठन झरही।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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