बाल कविता
तरिया के पार मा।
गली अउ कोठार मा।
रहे खेत खार मा।
बोलो ओखरा नाम का? माटी।
सागर के सार ये।
नदिया के धार ये।
जिनगी आधार ये।
बोलो येखर नाम का? पानी।
बिहना ले आय जी।
संझा के जाय जी।
ऊर्जा बगराय जी।
बोलो ओखर नाम का? सूरज
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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