Sunday, 6 December 2020

बाल कविता

बाल कविता 

आम पके कइसे मँय खावँव। 
कइसे करके भला गिरावँव।

का ऊपर मा चढ़े ल परही। 
गिर जाहूँ ता कोन पकड़ही। 

आम देख मन ललचावत हे। 
सिरतो मुँह पानी आवत हे।

पत्थर मार गिराना परही।
तब्भे आम एकाठन झरही।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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