Thursday, 10 December 2020

बाल कविता

बाल कविता 

           हवा 

हवा चले जब सर-सर सर-सर। 
पतंग उड़े तब फर-फर फर-फर। 

पत्ता झरथें झर-झर झर-झर।  
खार लगें फिर हर-हर हर-हर। 

मार झकोरा जब ये आथें। 
टीना टप्पड़ सब उड़ जाथें।  

धूंध गरेरा धर के लाथें। 
झाड़ झरोखा बड़ लहराथें। 

कतको ये हर रार मचावँय। 
हवा मिले सब जीवन पावँय।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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