बाल कविता
1
फद फिद फद ले।
टुरा गिरे बद ले।
टुरी देख खाँस दिस।
हिहि हाहा हाँस दिस।
2 समे
लकर धकर जे करे।
रोथे वो हा मुड़ धरे।
धीरे ज्यादा होय जी।
तभो सगा रोय जी।
जल्दी ला टार दव।
आलस ला मार दव।
जेन समे म आत हे।
उही सबो ल पात हे
3 बेंदरा
पइधे बेंदरा रोज के।
बीही खावय खोज के।
डारा टोरत जात हे।
निशदिन रार मचात हे।
4 बिहनिया
होत बिहानी कुकरा बासय।
बबा तको बिहना ले खाँसय।
गाय बिहिनिया ले रम्भावय।
बछरू दूध पिये बर जावय।
चिंव-चिंव चिंव-चिंव करे चिरइया।
बूता काम करत हे मइया।
सुरुज तको ऊपर मा आगे।
पर भइया अबतक नइ जागे।
5 चंदा
चंदा रतिहा कन आवत हे।
लाख चँदैनी सँग लावत हे।
सब के सँग मा मुसकावत हे।
रतिहा ला अबड़े भावत हे।
देख सुरुज ला घबरावत हे।
होत बिहिनिया छुप जावत हे।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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