बाल कविता
येती ओती मेछरावत हे।
चारा देखे ललचावत हे।
खेत खार भाँठा अउ भर्री।
नरवा नदिया बरछा दर्री।
ब्यारा बारी मा जावत हे।
हबर-हबर दिनभर खावत हे।
पेट मरत ले तनियावत हे।
चारा कहाँ पचा पावत हे।
उगल-उगल फिर मुँह लावत हे।
बइठे गरुवा पगुरावत हे।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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