Wednesday, 9 December 2020

बाल कविता

बाल कविता 

येती ओती मेछरावत हे।  
चारा देखे ललचावत हे। 

खेत खार भाँठा अउ भर्री। 
नरवा नदिया बरछा दर्री।

ब्यारा बारी मा जावत हे।
हबर-हबर दिनभर खावत हे। 

पेट मरत ले तनियावत हे।
चारा कहाँ पचा पावत हे।  

उगल-उगल फिर मुँह लावत हे।
बइठे गरुवा पगुरावत हे।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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