Saturday, 11 April 2020

लावणी छंद

कोरोना गीत

घर हा देख  सराया नोहय, नोहय सगा धरमशाला। 
घर मा रहिके जान बचावव, आये ते खतरा टाला।  

पाई पाई जोड़ जोड़ के, सुग्घर महल बनाए तँय। 
काम धाम के भाग दौड़ में, घर के सुख नइ पाए तँय। 
आज मिले मौका हे भाई, बनजा घर के रखवाला। 

भाई बहिनी मातु पिता सँग, समे बिता ले कुछ भाई। 
पत्नी लइका के सँग रहिके, मजा उड़ा ले कुछ भाई। 
समे कभू अइसे नइ आवय, द्वार लगा रख तँय ताला। 

लइका मन सँग खेल कूद लव, मातु पिता सँग बतियावव। 
बाई के सँग हँसी ठिठोली, संग रहव सब मुसकावव। 
इही याद रह जाही संगी, बाँकी जिनगी हे काला। 

दिलीप कुमार वर्मा 

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