Monday, 27 April 2020

शक्ति छंद

शक्ति छंद- दिलीप कुमार वर्मा

सुराही म पानी ल रखले कका। 
बढ़े घाम भारी त चख ले कका। 

रहे साफ ठंडा अबड़ बेर ले। 
नवा के सुराही बने हेर ले। 
पियाथे ससन भर कहे मान ले।  
भगाथे ग गरमी सही जान ले।     

न सोना न चाँदी न ताँबा हरे। 
न काँसा न प्लास्टिक इहाँ जी भरे। 
बने शुद्ध माटी पके आग मा।   
मया सब भराये हमर भाग मा।   

रहे स्वाद सुग्घर सुहाथे बने। 
सबो जानथे अउ रखे सबझने। 
तहीं नइ मँगाये मँगाले कका।
सुराही म पानी भरा ले कका।

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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