गजल-दिलीप कुमार वर्मा
122 122 122
मुझे वो नही मार पाया।
चला जो बना उनका साया।
नदी पार था ले गया वो।
मगर शेर से छीन लाया।
भरे क्रोध मे ठान कर वो।
मरोड़ा गला भी दबाया।
मगर क्या हुआ वो ही जाने।
उठाया गले से लगाया।
लगी जोर की भूख तब भी।
मुझे वो खिला कर ही खाया।
दिखे दो भले आज हम तो।
मगर एक दोनो की काया।
मुझे ले गया मारने को।
कहानी उसी ने बताया।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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