Saturday, 11 April 2020

लावणी छंद

कोरोना

अइसन युद्ध कभू नइ होइस, जइसन आज चलत हावय। 
कोरोना बैरी बन आए, कोन जनी ये कब जावय। 

सबो देश मा ये कोरोना, हाहाकार मचावत हे। 
बड़े बड़े बलशाली योद्धा, थोरिक टिक नइ पावत हे। 

सबो देश हे एक पक्ष मा, दुसर तरफ कोरोना हे। 
परत हवय तब भी ओ भारी, इही बात के रोना हे। 

बम गोला बंदूक सहेजे, बल शाली जे कहलाये । 
आज उही बलशाली राजा, याचक बन के ओ आये।

अस्त्र शस्त्र बेकार पड़े हे, काम कछू ये नइ आवय। 
अइसन बैरी घर मा खुसरे, आसानी ले नइ जावय। 

भारी भरकम सेना रख के, जे मन ताकत दिखलावय। 
आज उहू कोरोना ले जी, हार मान खुसरे हावय। 

धन दौलत कुछ काम न आवय, अइसन बैरी आये हे। 
बिना लड़े लाखो जनता ला, देखव धूल चटाये हे। 

साँप देख जे बिला खुसरथे, ते डरपोक कहावत हे। 
समे परे ता इही काम हर, सब के जान बचावत हे। 

ये कोरोना अइसे बैरी, ताकत ले नइ मर पावय। 
घर मा रहिके जान बचालव, कोरोना तक मर जावय। 

धोवत रइही हाथ जेन मन, मास्क लगा बाहिर जाही। 
रहे जेन घर के भीतर मा, उही सिपाही कहलाही। 

मनखे के अवकात दिखादिस, एक वायरस कोरोना। 
ताकत ले नइ काम चले अब, हाथ बराबर हे धोना। 

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार 

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