Monday, 27 April 2020

पञ्चचामर छंद

पञ्चचामर छंद 
12 12 12 12 , 12 12 12 12 

जिहाँ मया मिले नही उहाँ कहाँ निवास हो।
कदम बढ़ा बढ़े चलव जिहाँ मया ग आस हो।

लगे पियास भूख जी तभो कहूँ रुकव नही।
इहाँ उहाँ जिहाँ मिले रखे मया सही सही। 

बिना मया मिले अगर रहे ग खास भोग हो।  
नरी उतर सके नही गये हजार रोग हो। 

नरम नरम ग सेज तक गड़े समान सूल जी। 
बिना मया रुकव नही करव कभू न भूल जी।  

जिहाँ मिले मया सने त माँग खाव भात जी।
जमीन सेज कस लगे जठाय घाँस रात जी।

मया सनाय बेर ला मजा म खाय राम हे।  
मया ल पाय राधिका मया बँधाय श्याम हे।  

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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