पञ्चचामर छंद
12 12 12 12 , 12 12 12 12
जिहाँ मया मिले नही उहाँ कहाँ निवास हो।
कदम बढ़ा बढ़े चलव जिहाँ मया ग आस हो।
लगे पियास भूख जी तभो कहूँ रुकव नही।
इहाँ उहाँ जिहाँ मिले रखे मया सही सही।
बिना मया मिले अगर रहे ग खास भोग हो।
नरी उतर सके नही गये हजार रोग हो।
नरम नरम ग सेज तक गड़े समान सूल जी।
बिना मया रुकव नही करव कभू न भूल जी।
जिहाँ मिले मया सने त माँग खाव भात जी।
जमीन सेज कस लगे जठाय घाँस रात जी।
मया सनाय बेर ला मजा म खाय राम हे।
मया ल पाय राधिका मया बँधाय श्याम हे।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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