Wednesday, 15 April 2020

शिव छंद

शिव छंद  

देख गाँव गाँव मा। शोर आम छाँव मा । 
कोयली पुकारथे। मीठ राग वारथे। 

मस्त होय जे सुने। मीठ राग ला गुने। 
आम बौर आय हे। कोयली ल भाय हे। 

आय हे बसंत हा। जाड़ के ग अंत हा। 
फूल महमहाय हे। देख रंग छाय हे। 

पान पेंड़ ले झरे। रुख लगे डरे डरे। 
सब डहर विरान हे।चरमराय पान हे। 

लाल पान जब लगे। रुख लगे दगे दगे। 
फिर बहार आय हे। फिर खुमार छाय हे।  

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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