गजल- दिलीप कुमार वर्मा
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कहे बात सुन आज भाई।
बने तँय ह कर काज भाई।
बड़े आय विपदा हवय गा।
सबो घर गिरे गाज भाई।
सुरक्षा बने तँय बनाले।
तभे सब करे नाज भाई।
निकल झन अपन घर ले बाहिर।
तहूँ फिर पहिर ताज भाई।
कहे बात कतको न मानय।
तनिक तो करय लाज भाई।
सिपाही ठठावत हे डंडा।
न आवय तभो बाज भाई।
करोना मरे आज कइसे।
दिलीपाय नइ राज भाई।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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