सुखी सवैया
करिया बिलवा जब आवत हे घबरावत सूरज मूँह छुपावय। जब शेर सहीं ग दहाड़ करे धरती बपुरी तक हा घबरावय। धधकावत हे कड़कावत हे इठलावत ओ बिजुरी चमकावय। मन भावन रूप दिखा कर के हरसावत ओ बरसा बरसावय।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा बलौदाबाजार छतीसगढ़
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