Friday, 17 July 2020

सुखी सवैया

सुखी सवैया 

करिया बिलवा जब आवत हे घबरावत सूरज मूँह छुपावय।
जब शेर सहीं ग दहाड़ करे धरती बपुरी तक हा घबरावय।  
धधकावत हे कड़कावत हे इठलावत ओ बिजुरी चमकावय। 
मन भावन रूप दिखा कर के हरसावत ओ बरसा बरसावय। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छतीसगढ़

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