Friday, 31 July 2020

चौपाई

चौपाई 

मरने से पहले जी लेना। 
सोच समझ कर नैया खेना।  
जीवन नैया है मझधारा। 
चतुर सयाने उतरे पारा। 

धर्म कर्म से झोली भरते। 
मीठी बोली मुख पे धरते। 
निंदा से दूरी रखते हैं। 
जीवन अमृत फिर चखते हैं। 

मानवता की पाठ पढ़ाते। 
भला बुरा सबको समझाते। 
दीन हीन की बने सहायक। 
समरसता दे बनते नायक।  

दान धर्म का खोल पिटारा। 
मान कमाते हैं संसारा। 
भाई चारा को अपनाते। 
हाथ बटाने आगे आते। 

जीवन भर परमारथ करते। 
दुख पीड़ा जो सबके हरते। 
उसका नाव कभी ना हारे। 
ईश्वर खुद हीं पार उतारे। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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