शिशु गीत
पलना मा लइका झूलत हे।
दुख पीरा दाई भूलत है।
लइका के सुग्घर किलकारी।
सुन के खुश होवय महतारी।
कभू हाँसथे खिल-खिल खिल-खिल।
रोय कभू ओ पिल-पिल पिल-पिल।
हाथ पाँव छटकारत रहिथे।
सूसू तक हर क्षण क्षण बहिथे।
चंदा जइसन लइका हावय।
देख सबो के मन ला भावय।
गोद उठाके सब पुचकारय।
मया अपन पूरा सब वारय।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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