Sunday, 9 August 2020

गजल

1222 1222 1222 1222  

मया सब के महूँ पावँव बता मँय का करँव भाई। 
बने बादर अभी छावँव बता मँय का करँव भाई। 

ददा दाई हवय बीमार सीमा मा हवय जाना।
बता कइसे भला जावँव बता मँय का करँव भाई। 

चना के झाड़ मा मोला चढ़ाके ओ धकेले हे। 
उठे मँय नइ सकत हावँव बता मँय का करँव भाई  

गजब वो मुँह फुलोये हे मनाये बात नइ मानय। 
तियासी भात ला खावँव बता मँय का करँव भाई

बहुत जिद्दी हवय लइका मँगत हे चाँद ला के दे।
कहाँ ले चाँद मँय लावँव बता मँय का करँव भाई। 

सुते दाई हवय बिंदास लइका मोर रोवत हे।
कइसे लोरी भला गावँव बता मँय का करँव भाई। 

बलाये वो रहे रतिहा कुदावत हे कुकुर मोला। 
बचाये जान मँय धावँव बता मँय का करँव भाई। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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