शिशु गीत
जब ले बरसा के दिन आये।
लइका चिखला रहे सनाये।
राह चलत ओ गिरथे बद ले।
चिखला छटकत हावय फद ले।
गोड़ सटकथे पर नइ मानय।
चिखला मा जाये बर तानय।
फदफिद फदफिद मजा उड़ाथे।
भइसा बन के घर मा आथे।
कतको बरजत रहिथे दाई।
पर लइका नइ मानय भाई।
उधम मचावत रहिथे भारी।
खोर गली अउ ब्यरा बारी।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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