Thursday, 20 August 2020

छन्न पकैया

छन्न पकैया 

छन्न पकैया छन्न पकैया, लइका पन के खेला। 
भौरा बाँटी गिल्ली डंडा, कोहा मेली मेला। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, खेल रेस टिप आजा। 
पैरा कुरिया चढ़े पठउँहा, गोड़ा तरी लुकाजा। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, पिट्ठुल गजब सुहावय। 
खपरा ऊपर खपरा राखे, मारत पुक छरियावय। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, ओ डंडा पचरंगा। 
डण्डा ला डण्डा ले मारे, खेल बड़ा हे चंगा। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, धर के गड्डी जाना। 
गली गली मा दउड़त रहना, साँझ ढले घर आना। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, गरमी बइठ बितावय। 
तीरीपासा तिग्गा गोंटा, खेल भोटकुल भावय। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, चिखला के दिन आगे। 
छड़ा गड़उला बंगाला अउ, गेंड़ी गजब मचागे। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, तरिया भरजय भारी। 
दउड़ दउड़ के कूद लगाना, पार लगाना जारी। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, खेल कबड्डी खोखो। 
नून तेल बिल्लस सुर रस्सी,रंग बिरंगा चोखो। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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