Monday, 31 August 2020

बाल गीत

बाल गीत 

बादर करिया घिर आये हे। 
अँधियारी जग मा छाये हे। 

चिड़िया डर के भागत हावय। 
घुघवा तक हर जागत हावय।  

माल मवेसी घर आवत हे। 
सुनव कोलिहा नरियावत हे। 

मेढ़क तक टर्राये लागिस। 
झिंगुरा गीत सुनाये लागिस। 

घड़-घड़  बादर गरजावत हे।
जम्मो झन ला डरह्वावत हे। 

चमक-चमक के बिजुरी चम-चम। 
फोटो खींचत हावय झम-झम। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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