बाल गीत
रिमझिम-रिमझिम पाने बरसे।
छोटू राजू के मन हरसे।
खोर गली मा दउड़त आगे।
कूद-कूद के नाचन लागे।
गली छेक के बांध बनावय।
ओमा मोरी एक लगावय।
धीरे-धीरे पानी छोड़य।
संग सखा ला अपने जोड़य।
तरिया देख लबालब भर गे।
कतको मनखे देखत डर गे।
छोटू राजू जाय नहाए।
मंदिर ले ओ कूद दिखाए।
झुन्ना कस पीपर ले झूले।
कहे सखा सँग आके छू ले।
तरिया तक ले पार लगावय।
डुबक-डुबक के बड़ सुख पावय।
डाँट डपट बरजत हे दाई।
कहाँ मानथे लइका भाई।
लइका पन के खेल निराला।
सुरता हावय काला-काला।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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