Saturday, 15 August 2020

श्रृंगार सवैया संग


यशोदा घर गोपी मन आयँ। 
कन्हैया के करनी ल बतायँ। 
सुनावैं लल्ला के उत्पात। 
यशोदा थोरिक नइ पतियात। 

यशोदा सुन ले लल्ला तोर।  
करे नुकसान घघरिया फोर। 
चुरा के माखन ला ओ खाय। 
फोर के घघरी ओ हर आय।

अब गोपिन बात हमार सुनौ तुम झूठ शिकायत नाहि करौ।  
हमरो ललना बड़ छोटन हे तुम फोकट चोर न नाम धरौ।
ललना घर माखन खावत हे बिन फोकट ना तुम कान भरौ। 
लबरी लबरी तुम गोपिन हौ तुरते मुख टारत भाग टरौ। 

कन्हैया हावय कहाँ बताव। 
अभी ओला आघू मा लाव।  
पूछ ले ओखर ले सब बात। 
चोर हे तब्भे देख लुकात। 

लबारी नोहय सच तँय मान। 
कन्हैया ला थोरिक पहिचान। 
बड़ा नटखट होगे हे जान। 
पूछ ले धर के ओखर कान। 

सुन रे ललना इन गोपिन हा कुछ तोर शिकायत आय कहे।  
तुम फोरत हौ घघरी मटका अउ माखन खावत धाय कहे। 
सच बात कहौ नहिते सुन लौ करनी कर दण्ड ल पाय कहे। 
मुख माखन तोर लगे कइसे किसना अब साँच बताय कहे। 

बतावँव सुन ले मइया मोर। 
कहे सब मोला माखन चोर। 
भला मँय काबर बता चुरावँ। 
खाय जब माखन घर मा पावँ 

शिकायत जम्मो हे बेकार। 
सबो झन मोला करथे प्यार। 
मया के खातिर सबझन आय। 
बात मा तोला सब बिलमाय। 

अब तो सब जान डरे हव की किशना हर माखन ला नइ खाये। 
घघरी तक फोर सके नइ ये फिर काबर झूठ  कहे बर आये। 
समझावत हौं फिर से तुम ला तुँहरो करनी हमला नइ भाये।  
फिर झूठ कहे बर आहव ता भगवान तको तुम ला न बचाये। 

चलव री ये तो नइ पतियाय। 
मया के पट्टी आँख बँधाय। 
करे जे किशना हर ये बार। 
बाँध के रस्सी रखबो डार। 

दिखाबो किशना के करतूत। 
मानही तब्भे देख सबूत। 
किशनवा देखे अउ मुसकाय। 
गोप गोपी खिसियावत जाय। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़


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