Friday, 14 August 2020

घनाक्षरी


खेलत खेलत खेल, जमुना म गेंद गिरे, 
ग्वाल बाल सोंचत हे, गेंद कोन लाय जी। 
जमुना म नांग रहे, दाई ददा सब कहे, 
जान ल गँवाये बर, कोन उहाँ जाय जी। 
किशन कन्हाई चले, जमुना म गेंद लेहे, 
सखा सब बरजे हे, नइ पतियाय जी।
कालिया ल नाथ डरे, गेंद धर फन चढ़े,
मुरली बजाय कान्हा, नाच के दिखाय जी। 

सुन वो यशोदा सुन, तोर ललना के गुन, 
चोरी करे माखन ल, घर मा ओ आय ओ।  
भले नानकन हावे, बड़ा उतलङ्ग हावे,
धर के अपन सँग,सखा तक लाय ओ। 
सिका मा बँधाय रहे, तेला न बचाय येतो,
खोजी खोजी चारो कोती, माखन ल खाय ओ  
तोर नटखट कान्हा, बड़ा हलाकान करे, 
माखन ल खाय फिर, घड़ा फोर जाय ओ।  

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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