खेलत खेलत खेल, जमुना म गेंद गिरे,
ग्वाल बाल सोंचत हे, गेंद कोन लाय जी।
जमुना म नांग रहे, दाई ददा सब कहे,
जान ल गँवाये बर, कोन उहाँ जाय जी।
किशन कन्हाई चले, जमुना म गेंद लेहे,
सखा सब बरजे हे, नइ पतियाय जी।
कालिया ल नाथ डरे, गेंद धर फन चढ़े,
मुरली बजाय कान्हा, नाच के दिखाय जी।
सुन वो यशोदा सुन, तोर ललना के गुन,
चोरी करे माखन ल, घर मा ओ आय ओ।
भले नानकन हावे, बड़ा उतलङ्ग हावे,
धर के अपन सँग,सखा तक लाय ओ।
सिका मा बँधाय रहे, तेला न बचाय येतो,
खोजी खोजी चारो कोती, माखन ल खाय ओ
तोर नटखट कान्हा, बड़ा हलाकान करे,
माखन ल खाय फिर, घड़ा फोर जाय ओ।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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