Friday, 7 August 2020

घनाक्षरी

एसो झन आबे दीदी, तीजा पोरा माने बर, 
कोरोना ह करत हे, भारी हलाकान ओ। 

एहू कोती कोरोना हे, उहू कोती कोरोना हे, 
सबो कोती कोरोना ले, छूटत परान ओ। 

मोला कहूँ होही दीदी, तहूँ ला तो होई जाही,   
तोला कहूँ होही मोर, छूट जाही जान ओ।  

एसो तीजा घर मा ही, रही के मना ले दीदी, 
लुगरा ला भेज देहुँ, बात मोरो मान ओ। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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