Tuesday, 28 July 2020

रोला

रोला- दिलीप कुमार वर्मा 

शुरुआत 

जो करते शुरुआत, सफलता वो पाते हैं। 
ज्यादा करे विचार, उलझ कर रह जाते हैं।  
मंजिल की यदि चाह, राह पग तुरत बढ़ाओ। 
बाधाओं को सोंच, ब्यर्थ मत शंका लाओ।  

कुछ ऐसे भी काम, आज तक ना हो पाया। 
सायद मन संदेह, सोंच की काली साया। 
सोंचो अच्छी बात, मगर उलझन को खोलो। 
हो अच्छा शुरुआत, शब्द कुछ शुभ शुभ बोलो। 

मन की सारी बात, रखो मत सदा दबा कर। 
बन जाएंगे शूल, आज ही कह दो जा कर। 
हो सकता शुरुआत, सुनहरे दिन की कल से। 
रख मीठी मुस्कान, कहो मत कुछ भी छल से। 

एक एक पग जोड़, ऊँचाई पा जाते हैं। 
करते जो शुरुआत, चाँद को भी पाते हैं। 
गिरते वो मैदान, सवारी जो करते हैं। 
खाक गिरे ओ लोग, चले से जो डरते हैं। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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