Sunday, 19 July 2020

बाल गीत

बाल गीत 

उठा उठा के पटक रहा है। 
जो भी मिलता गटक रहा है। 
थोड़ा भी ना अटक रहा है। 
पेटू हाथी भटक रहा है। 

उत्तर से दक्षिण को जाता। 
पूरब से पश्चिम में आता। 
रौंद रौंद कर रार मचाता। 
खाने की चीजें सब खाता। 

भारी भरकम हाथी राजा। 
बजा रहा है सब का बाजा।  
पत्ते देखे ताजा ताजा। 
बना रहा है सबको खाजा। 

पाँव तले में जो आता है। 
चटपट तुरते हो जाता है। 
केवल पत्ते ही खाता है। 
माँसाहार नही भाता है। 

रह रह कर ओ सूड़ उठाता। 
पानी तन पर ओ दे जाता। 
सूपा जैसे कान हिलाता। 
मक्खी मच्छड़ दूर भगाता। 

भले शेर जंगल का राजा। 
पर उसका भी बजता बाजा। 
हाथी बोले आजा आजा। 
शेर बिचारा बोले जाजा। 

बच्चों का बेचारा हाथी।
सबसे प्यारा प्यारा हाथी। 
सचमुच राज दुलारा हाथी। 
जग में सबसे न्यारा हाथी।  

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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