जीवन विकास पूरा, सब ला बताये बर,
मछरी के रूप धर, भगवान आय हे।
पानी ले धरा म आये, कछुवा के रूप धरे,
धर के बराह रूप, पसुता बताय हे।
नरसिंह रूप धर, आधा पसुता म रहे,
वामन के रूप धरि, मानव कहाय हे।
करे हे विकास जब, परसु के रूप धरि,
राम रूप पूरा कृष्ण, जीवन सिखाय हे।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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