Tuesday, 28 July 2020

घनाक्षरी

जीवन विकास पूरा, सब ला बताये बर, 
मछरी के रूप धर, भगवान आय हे। 

पानी ले धरा म आये, कछुवा के रूप धरे, 
धर के बराह रूप, पसुता बताय हे।

नरसिंह रूप धर, आधा पसुता म रहे,
वामन के रूप धरि, मानव कहाय हे। 

करे हे विकास जब, परसु के रूप धरि, 
राम रूप पूरा कृष्ण, जीवन सिखाय हे। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 

बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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