दीप जलाएँ
आओ बच्चों दीप जलाएँ।
अँधियारे को दूर भगाएँ।
मात अमावस को देना है।
घर-घर के दुख हर लेना है।
कोई कोना रह ना जाये।
दीप जले जो सब को भाये।
दीपों की हम वली बनाएँ।
छत आँगन खलिहान सजाएँ
द्वार-द्वार रंगोली डालो।
जितना चाहो खूब सजालो।
फोड़ पटाखे खुशी मनाओ।
बजे ढोल तो नाच दिखाओ।
हँसी खुशी त्यौहात मनाना।
दीपों का यह पर्व सुहाना।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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