झोला
सोनू के झोला हे सुग्घर।
देख दिखत हे उज्जर उज्जर।
येमा पुस्तक कॉपी हावय।
जे दुनिया के ज्ञान बतावय।
भीतर मा बक्सा तक हावय।
जेमा पेंसिल रबर धरावय।
पट्टी करिया देख दिखत हे।
जेमा सोनू सुघर लिखत हे।
कलम धराये नीला लाली।
कॉपी बर ले हावय काली।
बाँटी भौंरा रस्सी हावय।
खेल समय मा खूब चलावय।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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