Saturday, 7 November 2020

हरिगीतिका छंद

गुरुदेव

गुरुदेव के आशीष ले,पाये हवन हम ज्ञान जी। 
उखरे कृपा के जोर ले,मिलथे सदा सम्मान जी।
अज्ञानता के तोपना ले,सब ढँकाये हे इहाँ।
गुरुदेव ही हर खोलथे, सच मानलव देखव जिहाँ।

गुरुदेव के ना जात हे, ना गोत्र अउ ना धर्म हे।
दुख दूर कर सुख सींचना,गुरुदेव के बस कर्म हे। 
गुरुदेव ओ बनथे सखा,जेकर करा सब ज्ञान हे।
सब ला बराबर जान के,शिक्षा करत जे दान हे।

बड़का उमर के होय ले,नइ बन सकय गुरु जान जी।
छोटे तको गुरु बन जही,जेकर करा हे ज्ञान जी।
जे हर सिखावत हे हुनर,गुरु तेन बड़का मान ले।
बस कान फूँकत जे इहाँ,नइ होय गुरु ये जान ले।  

गुरु के चरण मा मँय अपन,माथा नवावत हँव अभी।
गुरुदेव के आशीष ले,अँधियार मिट जावय सभी।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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