फद फिद फद ले,टूरा गिरे बद ले।
टुरी मुसकाय दय,हिहि हाहा गाय दय।
सावन के सार हे, पानी आर पार हे।
चिखला बम फार हे, गली म कोठार हे।
गेड़ी करे रेच रेच,गली होवय पेच पेच।
गेड़ी ह अटक गे, टूरा ह सटक गे।
टुरी रेंगे आँय बाँय,लहँगा हे झाँय झाँय।
चिखला छिटकाय गे,लहँगा सनाय गे।
ढिस ढास ढुस ले,टुरी रोदिस फुस ले।
टूरा ह चिढाय दय,हिहि हाहा गाय दय।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
No comments:
Post a Comment