दीप परब
दिया जलत हे येती ओती।
जगमग-जगमग चारो कोती।
घर अँगना परछी अउ कुरिया।
रिगबिग बारय घर भर जुरिया।
कोठा अउ खलिहान चमक गे।
गाँव गली चहुँ ओर दमक गे।
मंदिर-मंदिर द्वारे-द्वारे।
दिया जलावय मिलजुल सारे।
आज अमावस तक हे हारे।
धरती मा आये सब तारे।
ताल तलइया सुग्घर लागे।
डगर-डगर भर रौनक छा गे।
कोनो घर अँधियार न राहय।
रहे उजाला सबझन चाहय।
जुरमिल खुसी मनावव भाई।
दीप परब के मिले बधाई।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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