Saturday, 7 November 2020

मुक्तक

किसे कहदूँ बता साथी बुरा ओ काम करता है।
करे ओ काम जैसा भी,सभी का पेट भरता है।
निठल्ला बैठ जो खाये,हराजों लोग दुनिया में।
रहे उनसे भला ओ चोर जो तकलीफ हरता है।

गुनाहों को अगर देखो,तो ये इंसान धोखा है।
करे जो काम परखो तो,सभी ओ काम चोखा है।
जिसे कोई न कर पाया,हरिक ओ काम करता है।
जहाँ दम घुट रहा हो तो,हवा दे ओ झरोखा है।

दिलीप कुमार वर्मा

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