मेरी बेटी
मेरी बेटी प्यारी प्यारी।
मेरे घर की राज दुलारी।
मेरी अँखियों के दो तारे।
बड़े सलौने प्यारे प्यारे।
ये हँसते रहती है पल-पल।
जैसे नदियाँ करती कल-कल।
पंछी बन उड़ते रहती है।
मेरी गुड़िया सबसे चंचल।
सूरज की लाली किरणों सा।
सदा उजाला फैलाती है।
पूनम की ये चाँद सरीखे।
शीतलता जो ले आती है।
सुबह चहकती चिड़ियों जैसी।
मुझको गीत सुना जाती है।
रजनी गंधा फूल सरीखे।
घर आँगन को महकाती है।
सागर की लहरों सी है ये ।
कभी हिलोरे दे जाती है।
कभी झील के पानी जैसे।
शांत भाव ये दिखलाती है।
कभी इधर तो कभी उधर है।
ना जाने ये किधर-किधर है।
हवा सरीखे बहे हमेसा ।
मिले खुशी की डगर जिधर है।
इसे देख हर्षित होता हूँ।
इनके सपनों में खोता हूँ।
मुझको लगती प्यारी-प्यारी।
मेरी है ये दुनिया सारी।
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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