Friday, 18 September 2020

बाल गीत

बाल गीत 

दाई मोला बासी देदे, मँय हर इसकुल जाहूँ। 
दिनभर पढ़ लिख संगी मन सँग, संझा बेरा आहूँ। 

बढ़िया पढ़ के साहब बनहूँ, पइसा खूब कमाहूँ। 
कच्ची घर ला टोर टार के, पक्की बने बनाहूँ। 

नवा-नवा लुगरा मँय लाहूँ, अउ लाहूँ मँय धोती। 
तही पहिरबे लुगरा दाई, ददा पहिरही धोती। 

बड़का गाड़ी ले के आहूँ, हम सब घूमे जाबो। 
देश विदेश सबो ला देखत, घूम घाम के आबो।  

रंग-रंग के खाना पीना, हमरो घर मा होही। 
दाई मोरो राज करे अउ, ददा चैन से सोही। 

दूर गरीबी हमरो होही, जब मँय हर पढ़ पाहूँ। 
दाई मोला बासी देदे, मँय हर इसकुल जाहूँ। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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