गजल- दिलीप कुमार वर्मा
बहरे रजज़ मुरब्बा सालिम
मुस्ताफ़इलुन मुस्ताफ़इलुन
2212 2212
गुण गान गावव राम के
आशीष पावव राम के।
हावय कछू तकलीफ ता
दरबार जावव राम के।
कर आरती पूजा करव।
परसाद लावव राम के।
दाई ददा भगवान हे।
पग सर नवावव राम के।
कतकोन हे कहनी सगा।
लीला दिखावव राम के
घर मा रखव पबरित जगा।
मंदिर बनावव राम के।
अंतस अपन कर ध्यान जी।
मूरत बिठावव राम के।
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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