बरसात
बरसा के दिन आये हे।
ऊपर बादर छाये हे।
बादल गरजे घड़-घड़-घड़।
जिवरा धड़के धड़-धड़-धड़।
बिजुरी चमके चम-चम-चम।
मोर तको नाचे छम-छम।
टिप-टिप-टिप पानी बरसे।
खेले बर मुनिया तरसे।
जेन फिले घबरावत हे।
चौरा मा तिरियावत हे।
छाता धर सोनू आगे।
बिना फिले राजा लागे।
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
No comments:
Post a Comment