Wednesday, 23 September 2020

सुंदरी सवैया

सुंदरी सवैया 

मनमोहन के मुरली सुन के, सुध गोप गुवालिन के बिसरागे। 
जस हाल रहे तस हाल सखा दउड़े सब जंगल बीच म आगे। 
सब रास रचावत हे मिल के, रतिहा जब बीत जथे तब जागे। 
मन आंनद पा मुसकावत हे, सुध आय तहाँ घर जावय भागे। 

रचानाकार--दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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