Thursday, 3 September 2020

बाल गीत

सिपाही

मुझे सिपाही बनना होगा। 
सीमा पर अब तनना होगा। 

जो हमको फुँफकार रहे हैं। 
उसका फन कुचलना होगा।  

तन को अब मजबूत बनाने। 
सोना सा अब जलना होगा। 

ठंडी बरसा औ गर्मी के। 
हर मौसम में ढ़लना होगा। 

दुश्मन मार भगाने हेतु। 
मन में सासन भरना होगा। 

देश सुरक्षा की खातिर अब। 
मुझे सिपाही बनना होगा। 

रचनाकार-- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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