Friday, 25 September 2020

मुक्तक

मुक्तक 

दे रहा आवाज अब तो लौट आजा। 
गर वतन पे नाज अब तो लौट आजा। 
क्या रखा परदेश में जो भा गया है। 
छोड़ कर सब काज अब तो लौट आजा। 

सुन सुनाता हूँ सुहानी बात अपनी
क्या हँसी थी कल बिताई रात अपनी। 
चाँद था आकाश दूजा था जमी पे। 
मिल गया मुझको हँसी शौगात अपनी। 

दिलीप कुमार वर्मा

No comments:

Post a Comment