बाल गीत
पापा मेरे प्यारे-प्यारे।
सब के पापा से हैं न्यारे।
जो कहता हूँ कर देते हैं।
मेरी झोली भर देते हैं।
खेल खिलौने कपड़े लेते।
जो मैं चाहूँ झट वो देते।
मैं बोलूँ, घोड़ा बन जाते।
अपने ऊपर मुझे बिठाते।
जब बोलूँ, हाथी बन जाते।
मुझे बिठा कर सूँड़ हिलाते।
मस्ती करते शाम सवेरे।
सबसे अच्छे पापा मेरे।
काश सभी के पापा ऐसे।
होते मेरे पापा जैसे।
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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