Sunday, 6 September 2020

घनाक्षरी

राधा रानी

किशना के बात सुन, राधा रानी रिस करे, 
मुँह ल फुलाय चले, न तो बतियाय जी। 

कतको बुलाय कान्हा, बात म मनाय कान्हा, 
नाच के दिखाय कान्हा, तभो न ओ आय जी। 

पटकी पटकी पाँव, झटकी झटकी हाथ, 
मटकी मटकी राधा, नखरा दिखाय जी।  

मुरली बजाय कान्हा, गीत म रिझाय कान्हा, 
 दौड़ पास आये राधा, रुक नही पाय जी। 

रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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