Friday, 11 September 2020

गजल

गजल 
2122  2122 212 

मार के अब टांट झन छोलव सगा। 
मोर करनी झन कभू तोलव सगा। 

टेटका कस मुड़ हलाये नइ बनय। 
बात जे मन मा दबे बोलव सगा। 

कोन करनी कर भगाये ठौर ले। 
जेन जानत राज सब खोलव सगा। 

जब मुसीबत आय हे झन चुप रहव। 
झन दबावव दर्द ला रो लव सगा। 

बात येती के सुने ओती कहे।
दोस्ती मा झन जहर घोलव सगा। 

हाथ हर रँग गे हवय जब खून ले। 
कर के पश्चाताप अब धो लव सगा। 

काम बाँचे हे बहुत करना अभी। 
नींद भाँजे झन अभी डोलव सगा। 

रचानाकार--दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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