शिक्षक दिवस
गोलू मोनू बबली आजा।
बात बताऊँ ताजा ताजा।
फूलों का चल हार बनायें।
गुलदस्ता से कक्ष सजायें।
रंगोली की डिबिया लावो।
कमरे को अब खूब सजाओ
पांच सितंबर देखो आया।
जो हमको है याद दिलाया।
जिसने पढ़ना हमे सिखाया।
उनके पूजन का दिन आया।
आज दिवस शिक्षक का भाई।
चलो आरती आज सजाई।
पूजन कर माला पहनायें।
गुरु आशीष चलो सब पायें।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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