Saturday, 10 October 2020

गीत

गीत 

मँय माटी छत्तीसगढ़िया रे मँय माटी छत्तीसगढ़िया 
छत्तीसगढिया के सिरजाये, गुण हे बढ़िया-बढ़िया रे 

डिपरा डबरा कोड़ पाट के,समतल बने बनाये हे 
गोबर कचरा सरा-सरा के,तन मा मोर लगाये हे 
जोत-जोत भुरभुरा बनाये,नाँगर धरे नगरिहा रे 
मँय माटी छत्तीसगढ़िया रे

भाँठा टिकरा मुरमी वाला, हवँव मटासी सादा। 
नरवा तिरतिर करिया हावँव, अन्न उगाथौं जादा। 
भर्री भाँठा धनहा डोली, रहँव कहूँ नइ परिया रे 
मँय माटी छत्तीसगढ़िया रे

कोरा भीतर पानी धारा, चारो मुड़ा बहाथौं 
हीरा लोहा ताँबा सिरमिट, सब पथरा दे जाथौं 
कोइला के भंडार भरे हँव, दिखथौं करिया-करिया रे 
मँय माटी छत्तीसगढ़िया रे

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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