Sunday, 18 October 2020

चौपई

चौपई  (हँसिया ) 

लोहा ले हँसिया बन जाय,चंदा दूज बरोबर ताय। 
धार बनाये बर पजवाय,लकड़ी के जी बेंठ लगाय।

सब्जी काटे के अवजार,काटत रहिथे ये भरमार ।
रहिथे येमा अबड़े धार,जानत हाबय सब संसार।  

हँसिया के हे अड़बड़ ठाट,खसभुसरा ला करे सपाट।
आलू भाँटा गोभी काट,लाये जेला जा के हाट।   

हँसिया ले तँय लू ले धान,कांदी तक तँय लू के लान। 
ये हथियार तको हे जान,भागय चोर उचक्का मान।  

हँसिया कुदरी तक बन जाय,समे परे ले खान दिखाय। 
दातुन येमा बने कटाय,छील छाल काँटा झर्राय। 

काट पउल चाहे तँय चीर, हँसिया होथे बड़का वीर। 
रखले नोनी येला तीर,ये रँधनी खोली के हीर। 

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार 22-11-2019

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