घनाक्षरी
एक दूनी दुइ होथे,दुइ दूनी चार होथे,
चार दूनी आठ होथे,आठ दूनी सोला हे।
घीसत घीसत चाक ,दिमाक घिसाय जाथे,
तभो सीख पाय नही,टूरा बम भोला हे।
पढ़े बर आय नही,लिखे तक पाय नही,
तभो पास करे पड़े,धरे बस झोला हे।
बड़े बाढ़ कभू आथे,हमला पढ़े सिखाथे,
पढाये ल आय नही,कहे तोला मोला हे।
दिलीप कुमार वर्मा
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