Friday, 23 October 2020

गजल

गजल-दिलीप कुमार वर्मा

बहरे रमल मुसद्दस मख़बून मुसककन
फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन

2122 1122 22   

पूछ झन मँय ह अभी हँव कइसे। 
बात हे झूठ बता दँव कइसे।

सोन के भाव बढ़े हे भारी। 
मँय अँगूठी बता अब लँव कइसे।

आज खर्चा बिहा के बाढ़े हे।। 
ज्यादा पइसा ल बटोरँव कइसे। 

मोर दामाद निचट दरुहा हे।
मोर बेटी ल पठोवँव कइसे। 

सास घर आय लड़ावत हावय।
ये मुसीबत ले मे बाचँव कइसे।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़



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