शिव छंद
शेर के सभा लगे। जानवर जगे जगे।
सोंच काय होय जी। कोन जान खोय जी।
शेर जब दहाड़ थे। सुन सबो ग ताड़ थे।
का कहे सुने सबो। मुड़ गड़ा गुने सबो।
आज ले चुनाव हे। मोर ताज दाँव हे।
कोन हे विपक्ष मा। आय मोर कक्ष मा।
बात मँय फरी करँव। जान शेर मँय हरँव।
साम दाम दण्ड ले। बात होय ठण्ड ले।
जेन चाह ते मिले। पाय तोर मन खिले।
नइ सुने त जान ले। मौत होय मान ले।
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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